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शनिवार के दिन भूलकर भी ना खरीदें ये वस्तुएं, नहीं तो पड़ सकता है पछताना,

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  ज्योतिष शास्त्र में शनि अनेक नामों से सम्बोधित है, जैसे मन्दगामी, सूर्य-पुत्र, शनिश्चर इत्यादि। पुष्य,अनुराधा और उत्तराभाद्रपद शनि के नक्षत्र है तथा दो राशियों मकर और कुम्भ के वह स्वामी है। वें सूर्य,चन्द्र व मंगल को शत्रु एवं बुध व शुक्र को अपना मित्र मानते है तथा गुरु के प्रति सम भाव रखते है। शारीरिक रोगों में शनि को वायु विकार, हड्डी व दंत रोगों का कारक माना गया है। शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता हैं। शास्त्रों के अनुसार शनिदेव प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। अगर आपकी कुंडली में शनि से संबंधित कोई दोष बन रहा है, तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। शनि के कुप्रभाव के कारण आप हर तरह से कंगाल हो सकते हैं। सभी जानते हैं शनि दोष के कारण जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। जन्मकुंडली में शनि दोष के कारण जीवन नरक समान बन सकता है। शनि दोष की वजह से जीवन के हर क्षेत्र में असफलता मिलती है और सभी प्रयास फेल हो जाते हैं। आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएँगे कि शनिवार के दिन हमें किन वस्तुओं से दूरी बनाये रखनी हैं और शनि के प्रकोप से बचने के आसान उपाय क्या-क्या हैं।...

Disease factor - Saturn (रोग का कारक शनि)

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  सौर-मंडल में नौ ग्रह विद्यमान हैं जो समस्त ब्रह्मांड, जीव एवं सभी क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं। प्रत्येक ग्रह की अपनी विशेषतायें हैं जिनमें शनि की भूमिका महत्वपूर्ण है। शनि को दुःख, अभाव का कारक ग्रह माना जाता है। जन्म समय में जो ग्रह बलवान हों उसके कारक तत्वों की वृद्धि होती है एवं निर्बल होने पर कमी होती है किंतु शनि के फल इनके विपरीत हैं। शनि निर्बल होने पर अधिक दुख देता है व बलवान होने पर दुख का नाश करता है। अतः शनि के दो रूप हैं। यह चिंतनशील गहराईयों में जाने वाला योगी, संन्यासी एवं खोज करने वाला ग्रह है। दूसरा जातक को दिवालिया कर भिखारी बना देता है। अतः या तो मानव का स्तर ऊंचा ले जाता है या नीचे गिरा देता है, शनि जातक को उसके पूर्व जन्म के कर्मों अनुसार इस जन्म में शुभ-अशुभ कर्म अनुसार फल भुगतने का समय नियत करता है। शनि सुधरने का पूर्ण अवसर देते हुए नहीं सुधरने पर कर्मानुसार दंड देता है।  शनि देव को न्यायाधीश का पद प्राप्त है। शनि आयु कारक ग्रह है। शनि जिस भाव में बैठता है उस भाव की आयु की वृद्धि करता है एवं घटाता भी है। यदि शत्रु राशि या नीच का हो तो आयु घटती है...

आपकी जन्म राशि (birth sign) और किस नक्षत्र में पैदा हुए हैं आप, नाम के पहले अक्षर से जानिए,

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  सनातन धर्म में ज्योतिष का प्राचीन समय से ही बड़ा महत्व रहा है। ज्योतिष विद्या के द्वारा कोई भी व्यक्ति अपने जीवन के बारे में आंकलन लगा सकता है। फिर चाहे वह भूत, वर्तमान और भविष्य की घटनाओं के बारे में हो या व्यक्ति के स्वभाव और गुण के बारे में। आपको जानकर हैरानी होगी कि नाम के हर अक्षर के पीछे एक रहस्य छुपा है जिससे स्वभाव, प्रकृति, गुण दोष आदि का पता चलता हैं। हर किसी को किसी स्त्री या पुरुष के बारे में यह जानने की इच्छा जरुर होती है कि उस स्त्री या पुरुष का स्वभाव कैसा होगा। ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियां और 27 नक्षत्र होते हैं। हर राशि में सवा 2   नक्षत्र आते हैं। हर नक्षत्र के 4 भाग होते हैं। नक्षत्र के हर भाग को चरण कहा जाता है और हर चरण में नाम का एक अक्षर होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनुष्य के जीवन पर बारह राशियों का महत्वपूर्ण प्रभाव होता है। इन्हीं बारह राशियों के आधार पर जन्म नाम का निर्धारण किया जाता है। जन्म कुण्डली में चन्द्रमा जिस राशि में स्थित होता है, वह राशि चन्द्र राशि होती है। इसे जन्म राशि के नाम से भी जाना जाता है और इसे "नाम राशि" की संज्ञा ...

जाने क्या होता है सर्वार्थसिद्धि योग? (Sarvarthasiddhi Yoga)

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शुभ कार्य करने से पहले हिंदू परिवारों में शुभ मुहूर्त देखना परंपरा का अंग है। कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त और पंचांग शुद्धि देखे नहीं किया जाता है। इन शुभ योगों में अक्सर सर्वार्थसिद्धि योग की चर्चा होती है। आइए जानते हैं ये सर्वार्थसिद्धि योग क्या है और कैसे बनता है। भारतीय वैदिक ज्योतिष में इस योग को बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, जैसा की नाम से विदित है इस योग में कोई भी नवीन एवं शुभ कार्य शुरू करने से कार्य की सिद्धि अर्थात् कार्य निश्चित रूप से सफल होता है।     मान्यता है कि मंगलवार को किसी भी प्रकार का वाहन खरीदना एवं शनिवार को लोहे का सामान खरीदना अशुभ माना जाता है परन्तु सर्वार्थसिद्धि योग में यह किया जा सकता है। इस योग को निम्न प्रकार से निकाला जाता है-यह योग वार एवं नक्षत्र के संयोग से बनता है अर्थात् किसी वार को किसी विशेष नक्षत्र के संयोग से जो की निम्न है- रविवार को यदि हस्त, मूल, तीनों उत्तरा (उत्तरा फाल्गुन, उत्तरा आषाढ़, उत्तरा भाद्रपद) पुष्य एवं अश्विनी नक्षत्र का संयोग होता है तो रविवार को सर्वार्थसिद्धि योग माना जाएगा। सोमवार को यदि श्रवण, र...

कुंडली में बन रहे हैं ये योग, इंजीनियरिंग फील्ड में मिलेगी सफलता

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  ग्रामीण क्षेत्रों में खेती से लेकर शहरों में बनने वाली मल्टीस्टोरी बिल्डिंग्स तक और छोटे से मोबाईल से लेकर बड़ी-बड़ी गाड़ियों के निर्माण में इंजीनियर्स और इंजीनियरिंग ही आज अपनी प्रधान भूमिका निभा रही है।   अब तो यह युग पूरी तरह से तकनीक पर आधारित हो गया है इसलिए इंजीनियरिंग का उपयोग हर जगह बड़ी मात्रा में हो रहा है। इसके साथ ही इंजीनियर्स की डिमांड भी तेजी से बढ़ी है, हालांकि योग्य और कुशल इंजीनियरों की कमी आज भी बनी हुई है और इस फील्ड में कॉम्पीटिशन भी बहुत बढ़ गया है। इंजीनियरिंग का क्षेत्र अच्छा और सफलतादायक है या नहीं इसमें ज्योतिष शास्त्र हमारी सहायता और मार्गदर्शन करता है, क्योंकि ज्योतिषीय दृष्टि में हमारी कुंडली में बने ग्रह योग ही हमारी प्रतिभा और करियर के क्षेत्र को सुनिश्चित करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में मंगल और शनि से इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र के बारे में जानकारी हासिल होती है। शनि को लौह से जुड़े पदार्थों, मशीनों, औजारों, उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि का प्रतिनिधि ग्रह माना जाता है। वहीं मंगल विद्युत, अग्नि, इलेक्ट्रिक का प्रतिनिधि ग्रह है और मशीनों को गति देने ...

Love Horoscope 2022: (लव राशिफल 2022)

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  लव राशिफल 2022: जीवन में वह लोग बहुत ख़ुशनसीब होते हैं जिन्हें उनका प्रेम प्राप्त होता है। भारतीय ज्योतिष पर आधारित प्रेम राशिफल 2022 के माध्यम से आप यह जान पाएंगे कि इस वर्ष आपके प्रेम जीवन में क्या-क्या खास होने वाला है। जानें इस साल आपको प्यार के मामलों में कैसे फल मिलेंगे। हमारी कुंडली में अनेक ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है जिनके द्वारा कुछ विशेष योगों का निर्माण होता है। यही ग्रह योग हमारे प्रेम जीवन पर भी अलग अलग रूपों में प्रभाव डालते हैं। लव राशिफल 2022 आपके प्रेम जीवन को लेकर की गयी ऐसी भविष्यवाणी है, जो आपको यह बताएगी कि आपकी राशि के अनुसार वर्ष 2022 आपके प्रेम सम्बन्ध पर कैसा प्रभाव डाल सकता है। इस प्रेम राशिफल में हम आपको यह भी बताएँगे कि विभिन्न राशियों में जन्मे जातकों पर ग्रहों का क्या प्रभाव पड़ेगा और उस प्रभाव से आपके प्रेम जीवन के सम्बन्ध में किस प्रकार के उतार चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। प्रेम भविष्यफल में दी गई भविष्यवाणी की मदद से आप जान पाएंगे कि किन जातकों के जीवन में इस वर्ष प्यार की बहार आएगी और किस राशि के जातक प्रेम के रिश्ते को शादी के बंधन में बांध...

दिशाशूल (Dishashul) क्या है, जानिए आपकी प्रत्येक यात्रा कैसे बने 'शुभयात्रा'

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  कभी बिजनेस के सिलसिले में तो कभी किसी रिश्तेदारों से मिलने के लिए यात्रा करनी पड़ती है तो कभी कभी सैर-सपाटे और मूड बदलने के लिए भी यात्रा करते हैं। यानी जीवन में किसी न किसी उद्देश्य से हर व्यक्ति को कभी-कभी यात्रा करनी पड़ती है। कुछ यात्राएँ सुखद और आरामदायक होती है तो कुछ ऐसी भी यात्राएँ हो जाती है जो कठिनाई और परेशानियों की वजह से दुःखद एहसास बनकर रह जाती हैं। ज्योतिषशास्त्र में यात्रा के संदर्भ में कुछ नियमों का वर्णन किया गया है। माना जाता है कि इन नियमों का पालन किया जाए तो यात्रा सुखद और उद्देश्य में सफलता दिलाने वाली होती है। दिशाशूल व यात्रा के संदर्भ में दिन का महत्व- ज्योतिषशास्त्र के नियम के अनुसार सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा में यात्रा करने पर दिशाशूल लगता है। दिशाशूल का अर्थ है संबंधित दिशा में बाधा और कष्ट प्राप्त होना। इसलिए सोमवार एवं शनिवार को पूर्व दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। रविवार और शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल लगता है। मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा अनुकूल नहीं होती है तथा गुरूवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा कष्टकारी होती है...